🌞 छठ पूजा क्यों मनाई जाती है – पूरी जानकारी

परिचय

छठ पूजा भारत के प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह त्योहार खासतौर पर बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बहुत श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
यह पूजा सूर्य देव (भगवान सूर्य) और छठी मैया (उषा या प्रकृति माता) को समर्पित होती है।

छठ पूजा क्यों मनाई जाती है

🌅 छठ पूजा कब मनाई जाती है

छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है, यानी दीवाली के छठे दिन
कई जगहों पर यह पूजा साल में दो बार होती है —

  1. चैती छठ (चैत्र महीने में)
  2. कार्तिक छठ (दीवाली के बाद)

इनमें से कार्तिक छठ सबसे बड़ा और प्रसिद्ध पर्व माना जाता है।

☀️ छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा सूर्य देव की उपासना का पर्व है।
सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है।
माना जाता है कि सूर्य की कृपा से मनुष्य का जीवन सुखी, समृद्ध और निरोगी रहता है।

छठ पूजा में उगते और डूबते सूर्य दोनों को अर्घ्य दिया जाता है।
यह पूजा प्रकृति, जल, वायु और ऊर्जा के प्रति कृतज्ञता (thankfulness) का प्रतीक है।

🪔 छठ पूजा की कथा (कहानी)

पुराणों के अनुसार, जब पांडवों पर कठिन समय आया, तब द्रौपदी ने छठी मैया की पूजा की थी।
इसके फलस्वरूप उनके सभी कष्ट दूर हो गए।
कहा जाता है कि इस पूजा की शुरुआत सूर्यपुत्री उषा (छठी मैया) ने की थी, जिन्होंने लोगों को बताया कि सूर्य देव की उपासना से तन-मन शुद्ध और शक्तिशाली बनता है।

एक और मान्यता के अनुसार, राजा प्रियव्रत की कोई संतान नहीं थी। जब उन्होंने छठ देवी की आराधना की, तो उन्हें संतान प्राप्त हुई।
तब से यह पूजा संतान प्राप्ति और परिवार की सुख-शांति के लिए भी की जाने लगी।

🧘‍♀️ छठ पूजा कैसे की जाती है

छठ पूजा चार दिनों तक चलती है।
इन दिनों को बहुत नियम, शुद्धता और श्रद्धा से निभाया जाता है।

1. नहाय-खाय (पहला दिन)

भक्त स्नान करके शुद्ध भोजन करते हैं। इस दिन घर को साफ-सुथरा रखा जाता है और व्रती केवल एक बार शुद्ध भोजन करती हैं।

2. लोहंडा और खरना (दूसरा दिन)

इस दिन व्रती दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को गुड़-चावल और दूध से बने प्रसाद का सेवन करती हैं।
इसके बाद अगले 36 घंटे का निर्जला व्रत (बिना पानी) शुरू होता है।

3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन)

सूर्यास्त के समय व्रती डूबते सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
घाटों पर महिलाएँ गीत गाती हैं और दीप जलाकर सूर्य देव का धन्यवाद करती हैं।

4. प्रातः अर्घ्य (चौथा दिन)

अगले दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
फिर व्रत समाप्त होता है और लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं।

🌼 छठ पूजा के प्रमुख प्रसाद

  • ठेकुआ (गुड़ और गेहूं के आटे से बना विशेष पकवान)
  • कसार, चावल का लड्डू
  • नारियल, केला, गन्ना
  • दूध और गुड़ से बने पकवान

ये सभी प्रसाद बिना लहसुन-प्याज के बनाए जाते हैं और पूरी तरह शुद्ध होते हैं।

💫 छठ पूजा का संदेश

छठ पूजा शुद्धता, संयम, भक्ति और कृतज्ञता का प्रतीक है।
यह त्योहार हमें सिखाता है कि प्रकृति और सूर्य देव के बिना जीवन असंभव है।
यह पूजा मानव और प्रकृति के बीच के गहरे संबंध को दर्शाती है।

🙏 निष्कर्ष

छठ पूजा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भक्ति, पर्यावरण और स्वास्थ्य का उत्सव है।
इससे मन में सकारात्मकता आती है, शरीर शुद्ध होता है और समाज में प्रेम व एकता का संदेश फैलता है।

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