गुरुपुरब क्यों मनाया जाता है? जानिए गुरु नानक देव जी की अनमोल सीखें आसान शब्दों में
गुरुपुरब सिख धर्म का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहार है। यह दिन गुरु नानक देव जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। गुरु नानक देव जी सिख धर्म के पहले गुरु थे, जिन्होंने पूरे जीवन में लोगों को सत्य, प्रेम, सेवा और समानता का संदेश दिया।

🌸 गुरु नानक देव जी का जीवन
गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में तलवंडी (ननकाना साहिब) में हुआ था, जो आज पाकिस्तान में है। बचपन से ही वे बहुत बुद्धिमान और दयालु थे। उन्होंने हमेशा यह सिखाया कि ईश्वर एक है, और हर इंसान में वही शक्ति बसती है।
🕯️ गुरुपुरब कैसे मनाया जाता है
गुरुपुरब के दिन पूरे देश और दुनिया भर में गुरुद्वारों को खूबसूरती से सजाया जाता है।
सुबह-सुबह नगर कीर्तन निकाला जाता है, जिसमें लोग कीर्तन करते हुए गुरु नानक जी के संदेश फैलाते हैं।
गुरुद्वारे में अखंड पाठ होता है — यानी गुरु ग्रंथ साहिब का लगातार पाठ।
दिनभर लंगर (सेवा भोजन) चलता है, जहाँ हर धर्म और वर्ग के लोग एक साथ बैठकर खाना खाते हैं। यह समानता और भाईचारे का सबसे सुंदर उदाहरण है।
💫 गुरु नानक देव जी की अनमोल सीखें
- ईश्वर एक है – सब धर्मों का सार यही है।
- मेहनत करो, सच्चा कमाओ – जीवन में ईमानदारी से कमाई करो।
- नाम जपो – हमेशा ईश्वर को याद रखो।
- सबके साथ प्रेम और बराबरी से पेश आओ।
- सेवा करो – दूसरों की मदद करना ही सच्ची पूजा है।
🌟 गुरुपुरब का महत्व
गुरुपुरब हमें सिखाता है कि इंसान को सच्चाई, दया और सेवा के मार्ग पर चलना चाहिए।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि गुरु नानक देव जी के उपदेश आज भी उतने ही ज़रूरी हैं जितने 500 साल पहले थे।
✨ निष्कर्ष
गुरुपुरब सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि मानवता, प्रेम और समानता का संदेश है।
गुरु नानक देव जी की शिक्षाएँ हमें सिखाती हैं कि अगर हम दूसरों के साथ प्रेम और सम्मान से व्यवहार करें, तो दुनिया में शांति और खुशहाली फैल सकती है।